Haryana Parali Prabandhan Stubble Management Scheme 2026: Get ₹1200 per Acre Subsidy

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धान की कटाई के बाद खेतों में बची हुई पराली (Stubble) को जलाने से होने वाले भारी वायु प्रदूषण को रोकने और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने Haryana Parali Prabandhan (Stubble Management) Scheme 2026 की शुरुआत की है।

इस योजना के तहत जो किसान पराली को खेत में जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन मशीनरी के माध्यम से करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹1,200 प्रति एकड़ की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए इस योजना का आवेदन पूरी तरह से मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल के साथ जोड़ दिया गया है।

इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि In-situ और Ex-situ प्रबंधन क्या होता है और आप इस ₹1,200/एकड़ की सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे कर सकते हैं।

Scheme Highlights: Kharif 2026

विवरण (Feature)जानकारी (Details)
योजना का नामहरियाणा पराली अवशेष प्रबंधन योजना 2026
वित्तीय प्रोत्साहन (Subsidy)₹1,200 प्रति एकड़ (सीधे बैंक खाते में)
योग्य फसलधान (Paddy)
आवेदन पोर्टलfasal.haryana.gov.in (MFMB)
प्रबंधन के विकल्पIn-situ (खेत के अंदर) या Ex-situ (खेत के बाहर)

“In-situ” और “Ex-situ” पराली प्रबंधन क्या है?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पोर्टल आपसे पूछेगा कि आप पराली का प्रबंधन कैसे करेंगे (In-situ या Ex-situ)। सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको इनका सही अर्थ पता होना चाहिए:

In-situ और Ex-situ पराली प्रबंधन क्या है KAISE CHUNE

1. In-situ Management (खेत के अंदर प्रबंधन)

  • अर्थ: पराली को खेत से बाहर निकालने के बजाय खेत के अंदर ही मिट्टी में मिला देना।
  • कैसे होता है: किसान सुपर सीडर (Super Seeder), हैप्पी सीडर (Happy Seeder), जीरो टिल ड्रिल या रोटावेटर जैसी कृषि मशीनों का उपयोग करके पराली को बारीक काटकर मिट्टी में दबा देते हैं।
  • फायदे: यह पराली खेत में सड़कर प्राकृतिक खाद (जैविक कार्बन) बन जाती है, जिससे आने वाली फसल (जैसे गेहूं) की पैदावार बढ़ती है और यूरिया/डीएपी की जरूरत कम होती है।

2. Ex-situ Management (खेत के बाहर प्रबंधन)

  • अर्थ: पराली को खेत से बाहर निकालकर बेचना या उपयोग करना।
  • कैसे होता है: किसान स्ट्रॉ बेलर (Straw Baler) मशीन का उपयोग करके पराली के टाइट गट्ठर (Bales) बना लेते हैं।
  • फायदे: खेत अगली फसल के लिए जल्दी और पूरी तरह साफ हो जाता है। इन गट्ठरों को बायोमास प्लांट, एथेनॉल प्लांट, गत्ता फैक्ट्रियों या गौशालाओं में बेचकर किसान अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।

How to Apply Step-by-Step (ऑनलाइन आवेदन कैसे करें)

ध्यान दें: पराली प्रबंधन योजना (₹1,200/एकड़) का लाभ लेने के लिए कोई अलग से फॉर्म नहीं भरा जाता है। किसानों को अपनी फसल का विवरण देते समय ही इसका चयन करना होता है। खरीफ फसलों के संपूर्ण पंजीकरण के लिए आप सीधे Meri Fasal Mera Byora Registration Kharif 2026 पर जाकर अपना फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।
चूंकि 2026 में पोर्टल के नियमों में बदलाव हुआ है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले अन्य काश्तकार (ठेके की जमीन) और भूमि प्रोफाइल तैयार करने की पूरी Meri Fasal Mera Byora Registration Process को अच्छे से समझ लें ताकि आपका आवेदन प्रशासनिक स्तर पर रिजेक्ट न हो।

फॉर्म भरते समय इस योजना को क्लेम करने के मुख्य स्टेप्स इस प्रकार हैं:

Haryana Parali Prabandhan Stubble Management Scheme 2026 ₹1200 Subsidy

स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया (MFMB पोर्टल)

अगर आप पहले से ही खरीफ 2026 सीज़न के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं, तो ₹1,200 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन पाने के लिए आवेदन करना बेहद आसान है। इन चरणों का ठीक से पालन करें:

चरण 1: लॉगिन करें और ज़मीन की प्रोफ़ाइल तैयार करें

आधिकारिक ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर जाएँ: fasal.haryana.gov.in.

अपनी Family ID (PPP) या आधार कार्ड का इस्तेमाल करके लॉगिन करें और OTP के ज़रिए वेरिफ़ाई करें।

अपना ज़िला, तहसील, गाँव, मुरब्बा और किला नंबर चुनकर “ज़मीन का विवरण भरें” (Fill Land Details) वाला चरण पूरा करें।

चरण 2: फसल रजिस्ट्रेशन सेक्शन में जाएँ

एक बार जब आपकी ज़मीन जुड़ जाए, तो “फसल का विवरण भरें” (Fill Crop Details) पर क्लिक करें।

खरीफ 2026 चुनें।

‘कृषि फ़सल’ (Agriculture Field Crop) श्रेणी चुनें और अपनी मुख्य फ़सल के तौर पर ‘धान’ (Paddy) चुनें।

चरण 3: पराली प्रबंधन (Stubble Management) का विकल्प चुनें

सब्सिडी का दावा करने के लिए यह सबसे ज़रूरी चरण है।

धान की फ़सल की किस्म और विवरण डालते समय, पेज को नीचे स्क्रॉल करें।

आपको “पराली अवशेष प्रबंधन” (Stubble Management) नाम का एक खास सेक्शन मिलेगा।

सिस्टम आपसे पूछेगा कि आप अवशेषों का प्रबंधन कैसे करने की योजना बना रहे हैं। इनमें से कोई एक विकल्प चुनें:

In-situ Management (अगर मिट्टी में मिला रहे हैं)

Ex-situ Management (अगर गांठें/बेल्स बना रहे हैं)

ज़रूरी बात: इस सेक्शन को छोड़ें नहीं या खाली न छोड़ें। अगर आप कोई विकल्प नहीं चुनते हैं, तो कृषि विभाग यह मान लेगा कि आप इसमें हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं, और ₹1,200/एकड़ की सब्सिडी आपको नहीं मिलेगी।

चरण 4: अंतिम सबमिशन

अपनी फ़सल के सभी विवरणों की समीक्षा करें और “Submit” पर क्लिक करें। हर उस ‘किला’ (एकड़) के लिए इस प्रक्रिया को दोहराएँ जहाँ आपने धान लगाया है। अपनी रजिस्ट्रेशन पर्ची का एक प्रिंटआउट ले लें।

फिजिकल वेरिफिकेशन और पैसा (DBT Payment)

धान की कटाई के सीजन के दौरान कृषि विभाग और प्रशासन द्वारा सैटेलाइट (HARSAC) और फिजिकल वेरिफिकेशन के जरिए खेतों की निगरानी की जाती है।

  • निरीक्षण (Inspection): विभाग के अधिकारी (ADO/पटवारी) आपके रजिस्टर किए गए किल्ला नंबरों पर आकर चेक करेंगे कि आपने पराली को मशीन से मैनेज किया है या उसमें आग लगाई है।
  • सब्सिडी ट्रांसफर: यदि आपके खेत में आगजनी (Active Fire Location) की कोई घटना नहीं पाई जाती है और प्रबंधन सही मिलता है, तो आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT के माध्यम से ₹1,200 प्रति एकड़ की राशि भेज दी जाएगी। यदि खेत में आग लगी पाई गई, तो आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और जुर्माना भी लग सकता है।
CSC ऑपरेटर्स के लिए: किसानों से हमेशा पूछें कि क्या वे कटाई के बाद बेलर (Baler) या सुपर सीडर (Super Seeder) का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। "In-situ" या "Ex-situ" विकल्प को पहले से ही चुन लेने से यह सुनिश्चित होता है कि किसान को प्रति एकड़ मिलने वाला ₹1,200 का बोनस सही समय पर मिल जाए; इससे किसानों का आप पर भरोसा बढ़ता है और वे बार-बार आपके सेंटर पर आते हैं।

योजनाओं का लाभ उठाने और ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए नीचे दिए गए सीधे लिंक्स (Direct Links) का उपयोग करें:

विवरण (Important Links)आधिकारिक लिंक (Click Here)
MFMB आधिकारिक पोर्टल (Official Website)यहाँ क्लिक करें
किसान ऑनलाइन पंजीकरण (Farmer Direct Login)यहाँ क्लिक करें
CSC VLE लॉगिन (सीएससी संचालक लॉगिन)यहाँ क्लिक करें
आधार-बैंक लिंक स्टेटस चेक करें (DBT के लिए)यहाँ क्लिक करें

📌 जनहित ई-समाधान (Janhit E Solution) की विशेष गाइड्स:

योजनाओं को गहराई से समझने के लिए हमारे इन आर्टिकल्स को अवश्य पढ़ें:

कृषि विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन: किसी भी तकनीकी समस्या के लिए 1800-180-2060 पर (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) संपर्क करें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हरियाणा पराली अवशेष प्रबंधन योजना क्या है?

यह हरियाणा सरकार की एक पर्यावरण हितैषी योजना है, जिसमें धान की पराली को जलाने के बजाय मशीनरी (In-situ या Ex-situ) से उसका प्रबंधन करने वाले किसानों को ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

₹1,200/एकड़ की सब्सिडी के लिए फॉर्म कैसे भरें?

इसके लिए अलग से कोई पोर्टल नहीं है। आपको मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर अपनी धान की फसल दर्ज करते समय ही ‘Stubble Management’ सेक्शन में ‘In-situ’ या ‘Ex-situ’ का चुनाव करना होता है।

मैंने खेत के केवल एक छोटे से हिस्से में पराली जलाई है, क्या मुझे सब्सिडी मिलेगी?

बिल्कुल नहीं। यदि सैटेलाइट या फिजिकल वेरिफिकेशन में आपके पंजीकृत किल्ला नंबर में कहीं भी पराली जलने के सबूत मिलते हैं, तो आपका आवेदन रिजेक्ट कर दिया जाएगा।

मैं जमीन ठेके (Theka) पर लेकर खेती करता हूँ, ₹1,200 की सब्सिडी किसे मिलेगी?

जो किसान पोर्टल पर ‘अन्य काश्तकार’ (Leased) के रूप में फसल दर्ज करेगा और पराली का प्रबंधन करेगा, सब्सिडी का पैसा सीधा उसी के बैंक खाते में आएगा (जमीन मालिक के खाते में नहीं)।

क्या पराली योजना (₹1,200) और DSR धान बिजाई योजना (₹4,500) का लाभ एक साथ लिया जा सकता है?

जी हाँ, यदि आपने धान मशीन से बोया है (DSR) और कटाई के बाद पराली का भी प्रबंधन किया है, तो आप दोनों योजनाओं के विकल्प टिक करके कुल ₹5,700 प्रति एकड़ का लाभ उठा सकते हैं।

Janit Kumar Jatain
Janit Jatain is a CSC-certified Village Level Entrepreneur (VLE) with over 13 years of experience in digital governance. Since 2012, he has been the driving force behind Janhit E-Solution, bridging the gap between government schemes and citizens in Haryana. He specializes in simplifying complex documentation, ensuring verified and accurate information for everyone.

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